फिर से इस विवेक नाम का लड़का का चोरी का सेकंड पार्ट में बोलने जा रहा हूं।पहली चैप्टर में में बताया था कि लड़की गांव गया।और आज मैं और एक अच्छी बात बताओ जा रहा हूं। लड़की गांव जाने में बारिश किया हुआ।लड़की तो गांव चले गया। मगर लड़का गांव जाने के लिए जब कंपनी से छुट्टी में छोटी माता छोटी कम मिल गया, मगर एक गांव नहीं जा पाया क्योंकि ना इसके सामने एक बड़ा तस्वीर खड़ा हो गया था।
गांव जाने के लिए टिकट काट लिया। चमन पत्र खरीदी कर लिया, मगर गांव ना जा पाया।बहुत कोशिश किया मगर गांव जाने के लिए तहसील हो रहा था, मगर जाई नहीं पाया।इसी का हर पल आशिक आधार हो गया था। नहाने तो दूर में बात है। 24 घंटा और सुबह नहा रहा था।इस लड़का खाने-पीने सब छोड़कर याद कर कर के आंसू पर नहा रहा है।
लॉकडाउन के बगैर से लड़का गांव नहीं जा पाया।आज भी याद कर दिया जाने का कोशिश कर रहे जाने के मौका नहीं मिल रहे। घर पर गिरा है, कंपनी छुट्टी पर है।
ना प्यार छोड़ पाया। इसकी को मेरे दिल की तरह ना प्यार छोड़ पाया। इसकी को मेरा दिल की तरह तुम क्या समझोगे मुझको मैं तो फूल आवारा।
